
Chhaayaon Ka Shahar
1990's trip hop, green label, 1960's jazz, sadness, horns, bass, 808, motown, dub, dark, brooding, orchestr, slow,
06:05
2024-04-20 23:23:41 · By AIMusic Generator
Songtext
Chhaayaon Ka Shahar
[Verse] शहर की छायाओं में चल रहा हूँ छोड़े गए मित्रों ने मुझको अकेला। धीरे से खिंचती है यह टहनियाँ ठंडी ज़मीं में सूखा हुआ प्याला। [Verse 2] प्रेम और विश्वास से दूरी बढ़ती जा रही यहाँ खो गए ध्यान और परवाह। मिट रही है दोस्ती की मिठास एक अजनबी बन गया मेरा घर। [Chorus] जब रात आती है और ठंड का एहसास होता है शहर की छायाओं में सोचता हूँ क्यों रुका हूँ? प्यार की खुशबू खो चुकी है यहाँ अजनबी हूँ यहाँ ठंडा हूँ। [Verse] शहर की छायाओं में चल रहा हूँ छोड़े गए मित्रों ने मुझको अकेला। धीरे से खिंचती है यह टहनियाँ ठंडी ज़मीं में सूखा हुआ प्याला। [Verse 2] प्रेम और विश्वास से दूरी बढ़ती जा रही यहाँ खो गए ध्यान और परवाह। मिट रही है दोस्ती की मिठास एक अजनबी बन गया मेरा घर। [Chorus] जब रात आती है और ठंड का एहसास होता है शहर की छायाओं में सोचता हूँ क्यों रुका हूँ? प्यार की खुशबू खो चुकी है यहाँ अजनबी हूँ यहाँ ठंडा हूँ। [Verse] शहर की छायाओं में चल रहा हूँ छोड़े गए मित्रों ने मुझको अकेला। धीरे से खिंचती है यह टहनियाँ ठंडी ज़मीं में सूखा हुआ प्याला। [Verse 2] प्रेम और विश्वास से दूरी बढ़ती जा रही यहाँ खो गए ध्यान और परवाह। मिट रही है दोस्ती की मिठास एक अजनबी बन गया मेरा घर। [Chorus] जब रात आती है और ठंड का एहसास होता है शहर की छायाओं में सोचता हूँ क्यों रुका हूँ? प्यार की खुशबू खो चुकी है यहाँ अजनबी हूँ यहाँ ठंडा हूँ। [Verse] शहर की छायाओं में चल रहा हूँ छोड़े गए मित्रों ने मुझको अकेला। धीरे से खिंचती है यह टहनियाँ ठंडी ज़मीं में सूखा हुआ प्याला। [Verse 2] प्रेम और विश्वास से दूरी बढ़ती जा रही यहाँ खो गए ध्यान और परवाह। मिट रही है दोस्ती की मिठास एक अजनबी बन गया मेरा घर। [Chorus] जब रात आती है और ठंड का एहसास होता है शहर की छायाओं में सोचता हूँ क्यों रुका हूँ? प्यार की खुशबू खो चुकी है यहाँ अजनबी हूँ यहाँ ठंडा हूँ। [Verse] शहर की छायाओं में चल रहा हूँ छोड़े गए मित्रों ने मुझको अकेला। धीरे से खिंचती है यह टहनियाँ ठंडी ज़मीं में सूखा हुआ प्याला। [Verse 2] प्रेम और विश्वास से दूरी बढ़ती जा रही यहाँ खो गए ध्यान और परवाह। मिट रही है दोस्ती की मिठास एक अजनबी बन गया मेरा घर। [Chorus] जब रात आती है और ठंड का एहसास होता है शहर की छायाओं में सोचता हूँ क्यों रुका हूँ? प्यार की खुशबू खो चुकी है यहाँ अजनबी हूँ यहाँ ठंडा हूँ। [Verse] शहर की छायाओं में चल रहा हूँ छोड़े गए मित्रों ने मुझको अकेला। धीरे से खिंचती है यह टहनियाँ ठंडी ज़मीं में सूखा हुआ प्याला। [Verse 2] प्रेम और विश्वास से दूरी बढ़ती जा रही यहाँ खो गए ध्यान और परवाह। मिट रही है दोस्ती की मिठास एक अजनबी बन गया मेरा घर। [Chorus] जब रात आती है और ठंड का एहसास होता है शहर की छायाओं में सोचता हूँ क्यों रुका हूँ? प्यार की खुशबू खो चुकी है यहाँ अजनबी हूँ यहाँ ठंडा हूँ। [Verse] शहर की छायाओं में चल रहा हूँ छोड़े गए मित्रों ने मुझको अकेला। धीरे से खिंचती है यह टहनियाँ ठंडी ज़मीं में सूखा हुआ प्याला। [Verse 2] प्रेम और विश्वास से दूरी बढ़ती जा रही यहाँ खो गए ध्यान और परवाह। मिट रही है दोस्ती की मिठास एक अजनबी बन गया मेरा घर। [Chorus] जब रात आती है और ठंड का एहसास होता है शहर की छायाओं में सोचता हूँ क्यों रुका हूँ? प्यार की खुशबू खो चुकी है यहाँ अजनबी हूँ यहाँ ठंडा हूँ। [Verse] शहर की छायाओं में चल रहा हूँ छोड़े गए मित्रों ने मुझको अकेला। धीरे से खिंचती है यह टहनियाँ ठंडी ज़मीं में सूखा हुआ प्याला। [Verse 2] प्रेम और विश्वास से दूरी बढ़ती जा रही यहाँ खो गए ध्यान और परवाह। मिट रही है दोस्ती की मिठास एक अजनबी बन गया मेरा घर। [Chorus] जब रात आती है और ठंड का एहसास होता है शहर की छायाओं में सोचता हूँ क्यों रुका हूँ? प्यार की खुशबू खो चुकी है यहाँ अजनबी हूँ यहाँ ठंडा हूँ। [Verse] शहर की छायाओं में चल रहा हूँ छोड़े गए मित्रों ने मुझको अकेला। धीरे से खिंचती है यह टहनियाँ ठंडी ज़मीं में सूखा हुआ प्याला। [Verse 2] प्रेम और विश्वास से दूरी बढ़ती जा रही यहाँ खो गए ध्यान और परवाह। मिट रही है दोस्ती की मिठास एक अजनबी बन गया मेरा घर। [Chorus] जब रात आती है और ठंड का एहसास होता है शहर की छायाओं में सोचता हूँ क्यों रुका हूँ? प्यार की खुशबू खो चुकी है यहाँ अजनबी हूँ यहाँ ठंडा हूँ। [Verse] शहर की छायाओं में चल रहा हूँ छोड़े गए मित्रों ने मुझको अकेला। धीरे से खिंचती है यह टहनियाँ ठंडी ज़मीं में सूखा हुआ प्याला। [Verse 2] प्रेम और विश्वास से दूरी बढ़ती जा रही यहाँ खो गए ध्यान और परवाह। मिट रही है दोस्ती की मिठास एक अजनबी बन गया मेरा घर। [Chorus] जब रात आती है और ठंड का एहसास होता है शहर की छायाओं में सोचता हूँ क्यों रुका हूँ? प्यार की खुशबू खो चुकी है यहाँ अजनबी हूँ यहाँ ठंडा हूँ। [Verse] शहर की छायाओं में चल रहा हूँ छोड़े गए मित्रों ने मुझको अकेला। धीरे से खिंचती है यह टहनियाँ ठंडी ज़मीं में सूखा हुआ प्याला। [Verse 2] प्रेम और विश्वास से दूरी बढ़ती जा रही यहाँ खो गए ध्यान और परवाह। मिट रही है दोस्ती की मिठास एक अजनबी बन गया मेरा घर। [Chorus] जब रात आती है और ठंड का एहसास होता है शहर की छायाओं में सोचता हूँ क्यों रुका हूँ? प्यार की खुशबू खो चुकी है यहाँ अजनबी हूँ यहाँ ठंडा हूँ। ooooh yeahhh uh huh ooooh [Verse] शहर की छायाओं में चल रहा हूँ छोड़े गए मित्रों ने मुझको अकेला। धीरे से खिंचती है यह टहनियाँ ठंडी ज़मीं में सूखा हुआ प्याला। [Verse 2] प्रेम और विश्वास से दूरी बढ़ती जा रही यहाँ खो गए ध्यान और परवाह। मिट रही है दोस्ती की मिठास एक अजनबी बन गया मेरा घर। [Chorus] जब रात आती है और ठंड का एहसास होता है शहर की छायाओं में सोचता हूँ क्यों रुका हूँ? प्यार की खुशबू खो चुकी है यहाँ अजनबी हूँ यहाँ ठंडा हूँ। ooooh yeahhh uh huh ooooh [Verse] शहर की छायाओं में चल रहा हूँ छोड़े गए मित्रों ने मुझको अकेला। धीरे से खिंचती है यह टहनियाँ ठंडी ज़मीं में सूखा हुआ प्याला। [Verse 2] प्रेम और विश्वास से दूरी बढ़ती जा रही यहाँ खो गए ध्यान और परवाह। मिट रही है दोस्ती की मिठास एक अजनबी बन गया मेरा घर। [Chorus] जब रात आती है और ठंड का एहसास होता है शहर की छायाओं में सोचता हूँ क्यों रुका हूँ? प्यार की खुशबू खो चुकी है यहाँ अजनबी हूँ यहाँ ठंडा हूँ। ooooh yeahhh uh huh ooooh
